छात्रावासीय तथा अछात्रावासीय उच्च स्तरीय विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धियों तथा सामाजिक समायोजन का तुलनात्मक अध्ययन
Abstract
शिक्षा व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एक सामाजिक प्रक्रिया है। यह मनुष्य के सामाजिक जीवन को सार्थक बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत की तरह विश्व की अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी प्रारंभ से ही शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। बालक का व्यक्तिगत, मानसिक, शारीरिक, सामाजिक तथा संवेगात्मक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन पर्यन्त सरिता के नीर की भाँति प्रवाहित होती रहती है। शिक्षा के अभाव में व्यक्ति पशु तुल्य माना जाता है। शिक्षा अनेक तत्वों को प्रभावित करती है तथा साथ ही शिक्षा भी अनेक तत्वों से प्रभावित होती है। शिक्षा किसी व्यक्ति को ‘वास्तविक मनुष्य’ बनाती है। शिक्षा की प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति जीवन के लिए अनुकूल बन जाता है। शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर तथा निःस्वार्थ बनाती है।
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2000
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Articles